वारिसान / उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) कैसे बनवाएं: तहसील प्रक्रिया, शपथ पत्र एवं वंशावली
द्वारा शिवम तिवारी, संस्थापक, फॉर्मसूत्र · अपडेट: November 2026 · 9 min read
तहसील व ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से वारिसान (Varasdar) प्रमाण पत्र बनवाने की सम्पूर्ण विधि। जमीन नामंत्रण, बैंक खाता क्लेम व पारिवारिक पेंशन हेतु आवश्यक दस्तावेज।
परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के उपरांत उनकी चल-अचल संपत्ति, कृषि भूमि का दाखिल-खारिज (नामांतरण), बैंक खाते से धनराशि की निकासी, पारिवारिक पेंशन और बीमा राशि प्राप्त करने के लिए 'वारिसान प्रमाण पत्र' (Legal Heir / Surviving Member Certificate) बनवाना अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है। यह प्रमाण पत्र संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार अथवा उप-जिलाधिकारी (SDM) द्वारा क्षेत्रीय राजस्व जांच के आधार पर जारी किया जाता है।
मुख्य जानकारी
| जारीकर्ता प्राधिकारी | तहसीलदार / उप-जिलाधिकारी (SDM) / राजस्व विभाग |
|---|---|
| प्रथम श्रेणी (Class-I) वारिस | पति/पत्नी, पुत्र, पुत्रियां (विवाहित/अविवाहित) एवं मृतक की माता |
| आवेदन का माध्यम | राज्य ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल / तहसील लोक सेवा केंद्र |
| निस्तारण समयसीमा | 15 से 30 कार्यदिवस |
| अनिवार्य स्टांप पेपर | ₹10 से ₹100 का गैर-न्यायिक स्टांप शपथ पत्र |
चरण-दर-चरण प्रक्रिया
मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) प्राप्त करें
नगर निगम या ग्राम पंचायत के रजिस्ट्रार द्वारा जारी डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र वारिसान आवेदन का मूल आधार है। सुनिश्चित करें कि मृत्यु प्रमाण पत्र में मृतक का नाम उनकी जमीन, बैंक खाते और आधार से पूर्णतः मेल खाता हो।
वंशावली (शजरा) एवं नोटरीकृत वारिसान शपथ पत्र तैयार करें
ग्राम प्रधान/पार्षद से प्रमाणित वंशावली तैयार कराएं जिसमें मृतक के सभी जीवित प्रथम श्रेणी विधिक उत्तराधिकारियों का नाम दर्ज हो। इसके पश्चात ₹10 या ₹100 के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र बनवाएं कि मृतक के इन वारिसों के अलावा कोई अन्य विधिक वारिस नहीं है।
राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें
अपने राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल (जैसे edistrict.up.gov.in, दिल्ली ई-डिस्ट्रिक्ट, बिहार आरटीपीएस, एमपी ई-डिस्ट्रिक्ट आदि) पर नागरिक खाता बनाकर 'वारिसान / उत्तराधिकार प्रमाण पत्र' चुनें। सभी वारिसों के आधार कार्ड, वंशावली, मृत्यु प्रमाण पत्र एवं शपथ पत्र अपलोड करें।
क्षेत्रीय लेखपाल/पटवारी एवं कानूनगो द्वारा स्थलीय जांच
आवेदन ऑनलाइन संबंधित क्षेत्र के लेखपाल (पटवारी) को भेजा जाता है। लेखपाल गांव या मोहल्ले में जाकर पड़ोसियों और पंचों से पूछताछ कर वंशावली की सत्यता प्रमाणित करता है और अपनी स्थलीय आख्या (Report) तहसीलदार को प्रेषित करता है।
डिजिटल हस्ताक्षरित वारिसान प्रमाण पत्र डाउनलोड करें
तहसीलदार द्वारा रिपोर्ट अनुमोदित होते ही डिजिटल हस्ताक्षरित एवं क्यूआर कोड युक्त वारिसान प्रमाण पत्र जारी हो जाता है, जिसे आप पोर्टल से सीधे डाउनलोड कर प्रिंट ले सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज
- मृतक का मूल डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र (क्यूआर कोड युक्त)
- सभी जीवित विधिक वारिसों के आधार कार्ड एवं पैन कार्ड
- मृतक से रिश्ते का प्रमाण (अंकसूची, वोटर आईडी या जन्म प्रमाण पत्र)
- ग्राम प्रधान / सभासद / पार्षद द्वारा प्रमाणित पारिवारिक वंशावली (शजरा)
- नोटरी द्वारा सत्यापित वारिसान शपथ पत्र (मूल स्टांप पेपर)
- अन्य वारिसों का अनापत्ति शपथ पत्र (NOC) यदि कोई एक वारिस आवेदन कर रहा हो
स्टांप पेपर और नोटरी नियम
वारिसान शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से यह घोषणा होनी चाहिए: 'मृतक के उक्त लिखित वारिसों के अलावा अन्य कोई जीवित अथवा मृत वारिस नहीं है। यदि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति विधिक वारिस सिद्ध होता है, तो प्रार्थी आईपीसी की धारा 193/199 (झूठी गवाही व शपथ) के तहत दांडिक कार्यवाही का उत्तरदायी होगा।'
आधिकारिक पोर्टल और लिंक
- राष्ट्रीय सेवा पोर्टल (National Service Portal)
- सीआरएस जन्म-मृत्यु पंजीकरण पोर्टल
- पेंशनर्स कल्याण पोर्टल (भारत सरकार)
- फॉर्मसूत्र राजस्व एवं उत्तराधिकार प्रकोष्ठ
आम गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय
- विवाहित बेटियों का नाम छोड़ देना: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के अनुसार बेटियों का बेटों के बराबर जन्मसिद्ध हक है। विवाहित बेटियों का नाम छिपाने पर आवेदन निरस्त हो जाता है।
- मृतक की माता का नाम न लिखना: मृतक यदि विवाहित पुरुष है तो भी उसकी माता प्रथम श्रेणी वारिस होती है और उसका हिस्सा सुरक्षित रहता है।
- मृत्यु प्रमाण पत्र में नाम की गलती: जमीन के कागजात और मृत्यु प्रमाण पत्र में नाम भिन्न होना।
- कोर्ट में वाद लंबित होने पर भी आवेदन करना: यदि वारिसों के बीच अदालत में मुकदमा चल रहा है, तो राजस्व अधिकारी वारिसान जारी नहीं कर सकते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
बैंक क्लेम के लिए कोर्ट से सक्सेशन सर्टिफिकेट कब लेना अनिवार्य होता है?
जब मृतक के बैंक खातों, शेयरों या म्यूचुअल फंड में कोई वैध नॉमिनी नहीं होता और जमा धनराशि ₹5 लाख से अधिक होती है, या वारिसों के बीच विवाद होता है, तो बैंक भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 372 के तहत सिविल कोर्ट की डिक्री मांगते हैं।
कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लेने में कितनी कोर्ट फीस लगती है?
राज्य कोर्ट फीस अधिनियम के अनुसार चल संपत्ति के कुल मूल्यांकन का लगभग 2% से 3% न्यायिक स्टाम्प (Court Fees Stamp) के रूप में अदालत में जमा करना पड़ता है।
क्या विवाहित बेटी का नाम वारिसान प्रमाण पत्र में दर्ज होना अनिवार्य है?
हाँ, पूरी तरह अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों के अनुसार बेटियों को बेटों के समान उत्तराधिकार प्राप्त है। बेटी विवाहित हो या अविवाहित, उसका नाम वारिसान में दर्ज होगा।
तहसील से वारिसान प्रमाण पत्र बनने में कितने दिन लगते हैं?
अधिकांश राज्यों में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 15 से 30 कार्यदिवसों के भीतर वारिसान प्रमाण पत्र जारी करने का नियम है।
क्या बिना कोर्ट जाए बैंक में मृतक का पैसा मिल सकता है?
हाँ। यदि बैंक में जमा राशि बैंक की निर्धारित सीमा (जैसे 5 लाख रुपये) के भीतर है, तो तहसीलदार का वारिसान प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और सभी वारिसों के इंडेम्निटी बॉन्ड के आधार पर बैंक खाता क्लेम सेटल कर देता है।
यदि कोई वारिस अपना हक नहीं लेना चाहता तो क्या करें?
वह व्यक्ति ₹100 के स्टांप पेपर पर 'अनापत्ति शपथ पत्र (NOC)' या 'रिलिंकविशमेंट डीड (हकत्याग विलेख)' निष्पादित कर सकता है, जिससे उसका हिस्सा अन्य वारिसों के पक्ष में समर्पित हो जाता है।