पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना 2026: रूफटॉप सोलर ₹78,000 सब्सिडी, नेट-मीटरिंग व ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

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द्वारा , संस्थापक, फॉर्मसूत्र · अपडेट: October 2026 · 8 min read

pmsuryaghar.gov.in पर आवेदन की पूरी विधिक व व्यावहारिक प्रक्रिया। डिस्कॉम टेक्निकल फिजिबिलिटी, वेंडर चयन, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और सीधे बैंक खाते में डीबीटी सब्सिडी।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित 'पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना' के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को छत पर सोलर पैनल लगाने हेतु ₹78,000 तक की सीधी केंद्रीय सब्सिडी (DBT) दी जा रही है। इस योजना का लक्ष्य 1 करोड़ परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना, बिजली बिल को शून्य करना और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आमदनी का अवसर देना है।

मुख्य जानकारी

अधिकतम केंद्रीय सब्सिडी3 kW व उससे ऊपर पर ₹78,000 (1 kW पर ₹30,000, 2 kW पर ₹60,000)
मुफ्त बिजली लक्ष्यप्रति परिवार प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली
संचालक मंत्रालयनवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार
आधिकारिक राष्ट्रीय पोर्टलpmsuryaghar.gov.in
सस्ता बैंक लोनएसबीआई, पीएनबी आदि से मात्र ~7% ब्याज पर बिना गारंटी लोन

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. राष्ट्रीय पोर्टल (pmsuryaghar.gov.in) पर उपभोक्ता पंजीकरण करें

    आधिकारिक पोर्टल pmsuryaghar.gov.in अथवा 'PM Surya Ghar' मोबाइल ऐप पर जाएं। अपना राज्य, स्थानीय बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) चुनें और अपने बिजली बिल पर दर्ज उपभोक्ता खाता संख्या (Consumer Account Number / CA No.) दर्ज करें। मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से रजिस्ट्रेशन पूरा करें।

  2. सोलर आवेदन भरें एवं डिस्कॉम से तकनीकी स्वीकृति (Feasibility) प्राप्त करें

    ऑनलाइन आवेदन पत्र में अपनी छत का छाया-मुक्त क्षेत्रफल (प्रति 1 किलोवाट लगभग 100 वर्ग फुट), स्वीकृत लोड और वांछित सोलर क्षमता दर्ज करें। स्थानीय डिस्कॉम के इंजीनियर ट्रांसफॉर्मर क्षमता व लाइन सुरक्षा की जांच कर 15 कार्यदिवसों के भीतर ऑनलाइन 'Technical Feasibility' अनुमोदन जारी करते हैं।

  3. अधिकृत (Empanelled) वेंडर का चयन व अनुबंध करें

    स्वीकृति मिलने के बाद पोर्टल पर पंजीकृत डिस्कॉम-अनुमोदित वेंडर की सूची में से किसी एक का चयन करें और कार्य अनुबंध करें। सुनिश्चित करें कि वेंडर ALMM सूची के अनुसार भारत में निर्मित (DCR) सोलर पैनल और बीआईएस प्रमाणित ग्रिड-टाई इन्वर्टर ही लगाए।

  4. सोलर प्लांट स्थापना, नेट-मीटर आवेदन एवं डिस्कॉम स्थलीय निरीक्षण

    वेंडर द्वारा छत पर गैल्वनाइज्ड स्ट्रक्चर, सोलर मॉड्यूल और दोहरी अर्थिंग स्थापित की जाती है। कार्य पूरा होने पर पोर्टल पर 'Work Completion Report' जमा करें। डिस्कॉम टीम आकर प्लांट का भौतिक सत्यापन करती है और पुराना मीटर बदलकर नया बाई-डायरेक्शनल नेट-मीटर (Net Meter) लगाती है।

  5. कमीशनिंग प्रमाण पत्र व बैंक खाते में 30 दिन में सब्सिडी (DBT)

    नेट-मीटर सक्रिय होते ही डिस्कॉम पोर्टल पर कमीशनिंग सर्टिफिकेट जारी करती है। इसके बाद आवेदक अपना बैंक खाता विवरण और कैंसल चेक अपलोड करते हैं। केंद्र सरकार द्वारा मात्र 30 दिनों के भीतर ₹78,000 तक की सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते में डीबीटी द्वारा भेज दी जाती है।

आवश्यक दस्तावेज

स्टांप पेपर और नोटरी नियम

सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने हेतु भारत सरकार (MNRE) द्वारा अनुमोदित ALMM सूची के घरेलू डीसीआर (DCR) सोलर पैनल लगाना विधिक रूप से अनिवार्य है। केवल बैटरी वाले ऑफ-ग्रिड (Off-Grid) सिस्टम पर यह सब्सिडी मान्य नहीं होती; केवल ग्रिड-कनेक्टेड ऑन-ग्रिड अथवा नेट-मीटर युक्त हाइब्रिड सिस्टम ही इस योजना में पात्र हैं।

आधिकारिक पोर्टल और लिंक

आम गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या किराएदार भी पीएम सूर्य घर योजना में आवेदन कर सकते हैं?

नहीं। योजना के विधिक नियमों के अनुसार आवेदक का मकान व छत पर मालिकाना हक होना अनिवार्य है और बिजली कनेक्शन आवेदक के नाम होना चाहिए। किराएदार मकान मालिक की सहमति से उनके नाम पर ही यह लगवा सकते हैं।

सब्सिडी का पैसा बैंक खाते में कितने दिनों में आता है?

डिस्कॉम द्वारा नेट-मीटर लगाने और कमीशनिंग रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने के बाद 30 दिनों के भीतर केंद्र सरकार द्वारा डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधी सब्सिडी आपके बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।

क्या सोलर लगाने के लिए बैंकों से सस्ता लोन मिलता है?

हाँ, भारत सरकार के समझौते के तहत एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि राष्ट्रीयकृत बैंकों से मात्र लगभग 7% वार्षिक ब्याज दर पर बिना किसी गारंटी के 3 kW सिस्टम हेतु ₹2 लाख तक का आसान लोन उपलब्ध है।

नेट मीटरिंग से बिजली का बिल शून्य कैसे होता है?

नेट मीटर दिन में आपके सोलर पैनल द्वारा ग्रिड को भेजी गई बिजली (Export) और रात में ग्रिड से ली गई बिजली (Import) का हिसाब रखता है। महीने के अंत में केवल बचे हुए नेट यूनिट्स का बिल बनता है। यदि आपने खपत से अधिक बिजली बनाई, तो वह अगले महीने जुड़ जाती है।

संबंधित फॉर्म और आवेदन पत्र

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